❤️श्री राधा ब्रजचन्द्र❤️

 
❤️श्री राधा ब्रजचन्द्र❤️
अनूपम, जोरी श्यामा श्याम। इक सोरह सिंगार सजीं इक, नटवर भेष ललाम।। गलबाहीं दै दोउ वृंदावन, विहरत आठों याम। पुंज निकुंजनि मंजु रास – रस, खेलत पूरनकाम।। सनक समाधि छाँड़ि सनकादिक, बने विटप ब्रजधाम। आत्माराम ‘कृपालु’ श्याम की, आत्मा श्यामा नाम।। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, युगल माधुरी (01) श्यामा – श्याम की युगल जोड़ी सर्वथा अनुपमेय है | किशोरी जी ने अपना सोलह श्रृंगार कर रखा है एवं श्यामसुन्दर ने नटवर भेष बना रखा है | दोनों ही गलबाहीं दिये हुए वृन्दावन में निरन्तर विहार करते हैं | श्यामा – श्याम पूर्णकाम होते हुये भी सुन्दर लता कुंजों में रास रस खेलते हैं, जिसको देखने के लिये सनकादिक परमहंस अपनी समाधि की सनक छोड़कर ब्रज में वृक्ष बने हुए हैं | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि आत्माराम ब्रह्म श्यामसुन्दर की आत्मा ही ‘श्यामा’ नाम से अलंकृत हैं | Anupama, Jori Shyama Shyam Ika Sorah Singara Sajin Ika, Natvara Bhesha Lalaam Galabahi Dai Dou Vrindavan, Viharat Aatho Yaam Punja Nikunjani Manju Raasa-ras, Khelat Purankaam Sanak Samadhi Chhandi Sankadik, Bane Vitap Brajdhaam Atmaram 'kripalu' Shyam Ki, Atma Shyama Naam - Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj, Prem Ras Madira, Yugal Madhuri (01) Shri Radha and Shri Krishna make an utterly incomparable and unique pair. Kishori Ji is bedecked with all the sixteen traditional adornments and Shyamasundara is dressed in the style of an acrobat. Both of Them, with Their arms around each other, remain constantly engaged in transcendental lilas in Vrindavan. Although Shyama-Shyama are self-contented, yet They perform divine Rasa dance in beautiful bowers, to have a glimpse of which even the greatest paramahansas like Sanaka etc. are dwelling in Braj in the form of trees abandoning their craze for meditative trance. Jagadguru Shri Kripalu Ji states that the very soul of self-contented Supreme God, Shyamasundara is known by the name of 'Shyama' (name of Shri Radha).
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アップした人: shwetashweta

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