❤️श्री श्यामा कुंजबिहारी❤️

 
❤️श्री श्यामा कुंजबिहारी❤️
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हौं बलि जाँउ नागरी श्याम । ऐसैं ही रंग करौ निशि-बासर, वृन्दाविपिन कुटी अभिराम ।। हास-विलास सुरत रस सींचन, पशुपति-दग्ध जिवावत काम । हित हरिवंश लोल लोचन-अलि, करहु न सफल सकल सुख धाम ।। - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (56) भावार्थ - श्री हित सजनी आशीर्वाद देती हैं - "हे नागरी ! (श्री राधा) हे श्री श्याम (श्री कृष्ण) मैं आप पर बलिहार जाऊं ।(आप दोनों) वृंदावन की सुंदर कुंज कुटी में रात दिन निरंतर इसी प्रकार आनंदमय रंग विहार ही करते रहो ! निरंतर हास विलास एवं सूरत रस के सिंचन द्वारा पशुपति शिव जी के द्वारा जलाये गए (दग्ध किये गये) कामदेव को जीवन दान देते हुए हे सकल सुख धाम ! हमारे लोल लोचन रूप भ्रमरों को सफल कीजिए न !" (अर्थात आप दोनों स्वछन्द भाव से रति विलास करें और हम उसका दर्शन करके सुखी हों । “Haun Bali Jaoon Naagri Shyam” Shri Hita sajni says, “Oh dear Nagri (Radha), Oh dear Shri Shyam (Krishn), I sacrifice myself upon you!”. “Aisein Hi Rang Karau Nishi-baasar, Vrindavipin Kuti Abhiraam” May both of you, always perform this divine play and shower the streams of the nectar of unprecedented joy in Shri Vrindavan Dham. “Haas-vilaas Surat Ras Seenchan, Pashupati-dagdh Jivaavat Kaam” The amorous divine bliss of joking and talking revivifies Kamadeva, the one which is burned by Pashupati Nath Lord Shiva. “Hit Harivansh Lol Lochan-ali, Karahu Na Saphal Sakal Sukh Dhaam” May you both perform this divine play, and let our bumble bee eyes be blessed to behold the spectacular divine beauty of both of you together on this abode of all joys i.e Vrindavan. - Shri Hit Harivansh Mahaprabhu, Hit Chaurasi (56)
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shwetashweta
アップした人: shwetashweta

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